जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।
राजस्थान हाईकोर्ट ने वकीलों को सुरक्षा व वेलफेयर फंड देने से जुड़े मुद्दे पर राज्य सरकार से कहा है कि प्रदेश में 85 हजार वकील हैैं और ऐसे में उनके द्वारा वेलफेयर के लिए मंजूर किए दस करोड़ रुपए से क्या होगा। इसलिए राज्य सरकार को वेलफेयर फंड के लिए और दस करोड़ रुपए मंजूर किए जाने चाहिएं और दूसरे राज्याें द्वारा दिए जा रहे वेलफेयर फंड का भी आंकलन किया जाना चाहिए। वहीं अदालत ने राज्य सरकार से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की स्टेटस रिपोर्ट भी देने के लिए कहा है। जस्टिस एमएम श्रीवास्तव व वीके भारवानी की खंडपीठ ने यह निर्देश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व महासचिव प्रहलाद शर्मा की पीआईएल पर दिया। सुनवाई के दौरान राज्य के एएजी आरपी सिंह ने कहा कि सरकार ने वकीलों के वेलफेयर के लिए दस करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं और इनमें से पांच करोड़ रुपए दे भी दिए हैं। जिस पर बीसीआर के अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दिए गए पांच करोड़ रुपए में से करीब पौने पांच करोड़ रुपए वकीलों में बांट दिए हैं और सरकार बाकी पांच करोड़ रुपए देगी तो वह भी बांट देंगे। इस दाैरान प्रार्थी प्रहलाद शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वकीलों की सुरक्षा के लिए बनाए गए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को भी लागू नहीं किया है। जिस पर एएजी ने कहा कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट विधायिका के पास प्रक्रियाधीन है। दरअसल पीआईएल में कहा है कि प्रदेश में लगातार वकीलों पर हमले हो रहे हैं। बीसीआर ने वकीलों की सुरक्षा से जुड़े प्रोटेक्शन बिल को बनाकर राज्य सरकार के पास भेज रखा है लेकिन अभी तक वह लागू नहीं हो पाया है। नए वकीलों के पास आय का कोई साधन नहीं है इसलिए अधिकतम तीन साल का कार्य अनुभव रखने वालों को मासिक मानदेय दिया जाना चाहिए। हालांकि बीसीआर ने भी राज्य सरकार को पत्र लिखकर सौ करोड रुपए की मांग कर रखी है।

0 टिप्पणियाँ