(1)

अब ख़ुशी भी ख़ुशी नहीं लगती

दुख में संजीदगी नहीं लगती

अब तो सब वक़्त बिताते हैं यहाँ

दोस्ती दोस्ती नहीं लगती

(2)

बात की घात दोस्त के पीछे

दोस्त को मात दोस्त के पीछे

कितने चटखारे ले के करते हैं

दोस्त की बात दोस्त के पीछे

(3)

कन्नियाँ काटता बशर देखो

सुख में ही साथ का हुनर देखो

दोस्त तुम मानते हो जिनको भी

उनसे पैसे तो माँग कर देखो

(4)

काम बिन भी बुलाते दोस्त कहाँ

और बिन आज़माते दोस्त कहाँ

साथ हँसते-हँसाते फ़र्द हैं सब 

साथ आँसू बहाते दोस्त कहाँ

©️✍️ लोकेश कुमार सिंह 'साहिल'