जयपुर ब्यूरो रिपोर्ट।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अब एक बार फिर 22 अक्टूबर को फोन टैपिंग मामले में नोटिस भेज दिया है। हालांकि लोकेश शर्मा दिल्ली क्राइम ब्रांच के सामने पेश होंगे या नहीं यह अभी तय नहीं है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेश शर्मा को इसी मामले में 24 जुलाई को और मुख्य सचेतक महेश जोशी को 24 जून को दिल्ली बुलाया गया था, दोनों ने कारण बताते हुए जाने से इनकार कर दिया था। उस समय मुख्य सचेतक महेश जोशी ने उम्र का हवाला दिया था तो लोकेश शर्मा ने अतिरिक्त समय की मांग की थी। मामले में नोटिस देकर बुलाए गए महेश जोशी ने इस बात का इशारा किया है की इस नोटिस पर राजस्थान से जुड़े नेता नहीं जाएंगे। मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा कि यह FIR गलत है। उनका कहना है कि जब मामला राजस्थान की राजधानी जयपुर से जुड़ा हुआ है तो इसकी FIR दिल्ली में कैसे हो सकती है? अगर एक बार ऐसी परंपरा बन गई तो फिर केरल का व्यक्ति दिल्ली में या राजस्थान में या फिर कर्नाटक, हिमाचल या लेह लद्दाख में राजस्थान से जुड़े मामले दर्ज होने शुरू हो जाएंगे। महेश जोशी ने कहा की यह परंपरा नहीं होनी चाहिए यह संवैधानिक भी नहीं है और इस तरीके की परंपरा को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। जोशी ने एक तरह से भाजपा को अपने गिरेबां में झांकने की नसीहत दी। भाजपा पार्षदों का अपनी ही पार्टी की कार्यकारी महापौर शील धाभाई के विरोध में उतरने पर राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने भाजपा के अंतर्विरोध को लेकर चुटकी ली। कहा कि यह मैटर भाजपा का है और भाजपा में ही इस बात की शंका है की शील धाभाई भाजपा की हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि भाजपा में ही अंतर्विरोध है ऐसे में भाजपा को अपने अंतर्विरोध को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कटारिया, राठौर और सतीश पुनिया केवल बयान देने का काम करते हैं यही कारण है कि भाजपा में ऐसे अंतर्विरोध के हालात बन गए है। मुख्य सचेतक जोशी ने जमवारामगढ़ की घटना को निंदनीय बताया और कहा कि जिसे लेकर अभी हमारे पास कोई शब्द नहीं है। भरोसा दिलाया कि पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है। वो खुद पुलिस के संपर्क में हैं और पुलिस ने यह विश्वास दिलाया है कि इस मामले को पूरी संजीदगी से डील किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे लेकर ब्राह्मण समाज कि लोगों से बातचीत होगी और उन्हें समझाया भी जाएगा।