तीन साल पहले ग्रामीण इलाकों में घर-घर काे नल कनेक्शन से जाेड़कर पेयजल पहुंचाने के लिए शुरू की पंचवर्षीय जलजीवन मिशन याेजना तीन साल के बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से लाँच की गई इस योजना में 2024 तक जलदाय विभाग काे हर गांव और घर तक पीने का पानी पहुंचाना है।
इस योजना में 95 फीसदी सरकार व 5 फीसदी पैसा जन सहभागिता से खर्च किया जाना है। लेकिन ग्राम पंचायत और जलदाय विभाग आगामी बिजली बिल और मरम्मत पर होने वाले नियमित खर्च उठाने को तैयार नहीं है। ऐसे में प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इससे अब लोगों को पेयजल की उम्मीद टूटने लगी है।
जल जीवन मिशन में सीकर जिले की 375 ग्राम पंचायताें के 1179 राजस्व गांवाें के करीब चार लाख से ज्यादा परिवाराें को शामिल किया था। योजना के तहत इन परिवारों को घरों तक पेजयल पाइप लाइन से जोड़ा जाना है। तीन साल की मशकत के बाद भी जलदाय विभाग 223 ग्राम पंचायताें में 359 गांवाें के लिए पहले चरण में 411 कराेड़ रुपए का प्लान तैयार कर पाया है। पंचायत, जलदाय विभाग व अन्य एजेंसियों में समन्वय नहीं बना तो यह प्रोजेक्ट हाथ से निकल सकता है।
देरी के कारण ढाई लाख लाेग हाे गए याेजना से वंचित
तीन साल से याेजना आगे नहीं बढ़ने से जिले में करीब 882 गांवाें के ढाई लाख ग्रामीण परिवार घर-घर पेयजल योजना से वंचित हाे चुके हैं। क्याेंकि याेजना में पांच साल के दाैरान जिले में करीब पांच लाख परिवाराें को पेयजल कनेक्शन से जाेड़कर शुद्ध पानी पहुंचाया जाना है। ऐसे हालात में ग्रामीणाें से सरकार की पेयजल याेजना भी दूर हाे रही है।
ये है जल जीवन मिशन याेजना
केंद्र व राज्य सरकार की 95 प्रतिशत वित्तीय भागीदारी से प्रत्येक गांव में पेयजल समस्याग्रस्त परिवार का सर्वे कर नल कनेक्शन से पीने का पानी पहुंचाया जाना है। याेजना में प्राेजेक्ट लागत की पांच प्रतिशत राशि ग्राम पंचायताें काे जन सहयाेग से जुटानी है। जिसमें 20 घराें के समूह वाली आबादी के प्रत्येक परिवार के लिए अधिकतम 30 हजार रुपए एवं दूरदराज में बसे हुए परिवाराें के पेयजल कनेक्शन के लिए अधिकतम 50 हजार रुपए तक खर्च कर पानी पहुंचाया जा सकता है।
पंचायतों के पास पैसा और संसाधनों का अभाव, इसलिए जिम्मेदारी से बच रहे हैं
पंचायत द्वारा जन सहयाेग से याेजना का संचालन संभव नहीं हैं। क्योंकि सरकार पांच फीसदी बजट की डिमांड कर रही है। पंचायतों के पास बजट नहीं है। पंचायत के पास याेजना क्रियान्वयन के लिए कर्मचारियाें का अभाव है। ग्राम पंचायत के पास जलदाय विभाग की तरह तकनीकी कर्मचारी भी नहीं हैं। सरकार ने योजना लाॅन्च की है तो जिम्मेदार जलदाय विभाग को ही जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
हनुमान प्रसाद झाझड़ा, जिलाध्यक्ष, सरपंच संघ
योजना की गाइड लाइन में ग्राम पंचायतों को ही सौंपी गई है जिम्मेदारी
गाइड लाइन के अनुसार विभाग का काम याेजना में प्रत्येक गांव-घर तक पानी पहुंचाना है। इसका संचालन ग्राम पंचायताें काे ही करना है। केंद्र सरकार द्वारा जलजीवन मिशन याेजना जनसहभागिता के मकसद से ही शुरू की गई थी। याेजना का संचालन आमजन की भागीदारी से ग्राम पंचायताें के माध्यम से ही संभव है। याेजना का संचालन पंचायताें के अधीन हाेने से ही आमजन काे सीधा लाभ मिलेगा।
चुन्नीलाल, एसई, जलदाय विभाग


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