देह व्यापार की झलक
एक बार उसका एक परिचित राजकुमार शर्मा जनसत्ता के दफ्तर में मेरे पास चला आया। कहने लगा, मैं फिल्म बना रहा हूं, मेरी खबर छाप दीजिए। उसकी फिल्म का नाम था, पति एक पत्नियां अनेक। मुझे वह फर्जी लगा। उससे पीछा छुड़ाने के लिए मैंने संझा जनसत्ता में एक चार लाइन की डैश न्यूज लगवा दी कि फिल्म निर्माता राजकुमार शर्मा ने पति एक पत्नियां एक फिल्म बनाने की घोषणा की है। इसके बाद एक दिन उसने मुझे कांदिवली में एक बंगले में आमंत्रित किया।
वह शानदार बंगला था। ऊपर के कमरे में बैठकर वह बात करने लगा। कह रहा था, मुझे इंटरव्यू छपवाना है। मैंने उससे पूछा, फिल्म बनाने के लिए आपकी क्या तैयारी है? उसने कहा, मैंने वेस्टर्न फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन की सदस्यता ले ली है और लिटरेचर भी छपवा लिया है। उसने सदस्यता की रसीद दिखाई और लैटर हैड-लिफाफे दिखाए। उन पर आरके प्रोडक्शन्स छपा था। मैंने कहा, यह तो कोई भी कर सकता है। फिल्म के मुख्य कलाकार कौन हैं, निर्देशक कौन है, कहानी कौन लिखेगा? उसने कहा, कहानी आप ही लिख दीजिए।
मैं समझ गया कि फिल्म निर्माण के पीछे इसका धंधा कुछ और है। इसका खुलासा तत्काल हो गया, जब उसने मुझे एक अन्य कमरे में भेजा। वह शानदार बैडरूम जैसा कमरा था। थोड़ी देर में एक लड़की ने कमरे में प्रवेश किया। उसके बाल गीले थे। शायद वह स्नान करके बाथरूम से गाउन पहनकर निकली थी और ऐसे ही कमरे में आ गई थी। मैंने उसका नाम पूछा। वह चौथी पास गुजराती लड़की थी। मैं बहुत देर तक चुप रहा। उस लड़की को देखता रहा। शायद उसे चुप्पी अच्छी नहीं लग रही थी। उसने मुंह फुलाती हुई आवाज में कहा, कुछ करना नहीं है क्या?
मैं क्या करता? बुरी तरह हैरान था। मैंने कहा, तू अभी नहा-धोकर आई लगती है, ये मेरा दोस्त मुझे खुश करना चाहता है, इसलिए तुझे मेरे पास भेज दिया है, मैं कुछ नहीं करूंगा, तू जा। मेरी बात सुनकर उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे और वह आंसू पोंछते हुए चली गई। मैंने बाहर के कमरे में पहुंचकर राजकुमार से कहा, ये क्या करते हो? मैं यहां यह सब करने तो आया नहीं था। मेरे व्यवहार से वह हैरान था। उसने मुझे कांदीवली स्टेशन तक पहुंचा दिया। पवन ठाकुर से उसने मेरे बारे में कहा, यह खतरनाक आदमी है।
कुछ दिनों बाद राकेश श्रीमाल ने राजकुमार शर्मा का इंटरव्यू छापा। दरअसल उस राजकुमार शर्मा का फिल्मों से कोई लेना-देना नहीं था। वह देह व्यापार में लिप्त था। किसी पुलिस अफसर ने उसे फाइनेंस किया था और उसने कांदिवली में बंगला किराये पर ले लिया था। राकेश श्रीमाल ने उसका इंटरव्यू किस आधार पर छापा, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
ऐसा ही एक जगदीश पांडे था, जिससे राकेश दुबे ने परिचय करवाया था। एक बार जब मैं इंदौर जाने वाला था तो वह भाइंदर से बोरीवली स्टेशन तक मुझे छोड़ने पहुंचा। ट्रेन 8 बजे की थी, जो लेट हो गई थी और 11 बजे पहुंचने वाली थी। तीन घंटे कैसे गुजारें, वापस घर जाकर लौटें या यहीं टाइम पास करें, इस ऊहापोह में ध्यान आया कि दुबेजी का कार्यालय स्टेशन के सामने ही है, वहीं चलते हैं। मुझे रातभर ट्रेन में सफर करना था, बर्थ पर सोना था, इसलिए कपड़े भी मैंने सामान्य ही पहने हुए थे, जबकि जगदीश पांडे सफारी सूट पहने हुए था, रौबदार दिख रहा था।
हम उत्तर प्रदेशीय महासंघ के कार्यालय में पहुंचे तो योगेश दुबे मौजूद थे। उन्हें बताया कि ट्रेन पहुंचने में देर है, इसलिए हम यहां चले आए। उन्होंने तुरंत चाय मंगवाई। फिर कहा, भोजन करेंगे? मैंने हां कहा तो उन्होंने घर चलने की बात कही। फिर कहा घर से ही टिफन मंगवा लेते हैं। मैंने कहा, आप कष्ट मत कीजिए, ऊपर रेस्तरां के मैनेजर को फोन कर दीजिए, हम यहीं कुछ देर टाइम पास करेंगे। योगेश ने मैनेजर को फोन कर दिया। वह बार एंड रेस्तरां था। वहां लड़कियां भी डांस करती थीं।
योगेश ने फोन किया तो मैनेजर ने अच्छी खातिरदारी की, लेकिन पहनावा देखकर उससे कुछ चूक हो गई। जगदीश पांडे सफारी सूट पहने तनकर आगे चल रहा था और मैं थोड़ा झुका हुआ सा हाथ में सूटकेस थामे पीछे चल रहा था। मैंने इस स्थिति का आनंद उठाया। मैनेजर ने जगदीश पांडे को खूब तवज्जो दी। सबसे अच्छी जगह बैठाया। पांडे ने भी सबसे अच्छी शराब का पैग मांगा, जबकि मैं मैकडॉल रम पीता था, उसी की फरमाइश की। सिगरेट मांगी तो पांडे ने ट्रिपल फाइव मंगाने के लिए कहा, जबकि मैं विल्स पीता था। मैंने विल्स ही मांगी।
करीब एक घंटा हम वहां नाच देखते रहे। पांडे का रौब ज्यादा ही होने लगा तो मैंने मैनेजर से कहा कि यहां शोर बहुत हो रहा है, कहीं खुली हवादार जगह पर बैठेंगे और खाना खाएंगे। मैनेजर ने हाल के बाहर एक छत जैसी खुली जगह पर टेबल लगवाई, परोसगारी के लिए तीन लड़कियां नियुक्त कीं और खुद हमारे साथ टेबल पर बैठा। खाना खाते-खाते साढ़े दस बज चुके थे। हम रेस्तरां से निकले और सामने बोरीवली स्टेशन पर पहुंच गए। मैं ट्रेन में सवार हो गया।
मैं जब इंदौर से लौटा तो योगेश दुबे ने शिकायत की कि आपकी जान पहचान कैसे लोगों से है? मैंने पूछा, क्या हुआ? उन्होंने कहा, आपके साथ जगदीश पांडे आए थे। वो अब मैनेजर के पीछे लग गए हैं। कहते हैं, इस लड़की से बात कराओ, उस लड़की से बात कराओ। योगेश की बात सुनकर मैं हैरान हुआ। यह कहते हुए बात संभाली कि बार डांसरों के बारे में जानकारियां जुटा रहा होगा। मुझे जगदीश पांडे पर बहुत गुस्सा आ रहा था। मैंने उसके घर पहुंचकर उसको खरी-खोटी सुनाई। फिर यह भी बता दिया कि मैंने कह दिया है, तुम कुछ जानकारियां जुटाने गए थे, अब बिलकुल मत जाना। इसके बाद जगदीश पांडे बार डांसरों की संस्था से जुड़ गया और तमाम लेडिज बारों में उसका आना-जाना होने लगा।

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