त्योहारी सीजन में मिलावट को रोकने के लिए सरकार ने शुद्ध के लिए युद्ध अभियान की शुरुआत की है ताकि खाद्य पदार्थों में मिलावट को रोका जा सके। लेकिन मिलावट को रोकने के लिए प्रदेश में फूड सेफ्टी ऑफिसर्स (एफएसओ) की संख्या काफी कम है। जबकि त्योहारों के समय में ही एफएसओ की अधिक जरूरत होती है क्योंकि इस समय मिलावट का कारोबार अधिक बढ़ जाता है। इसी समय सरकार मिलावट को रोकने के लिए अभियान चलाती है। राज्य में खाद्य पदार्थों की शुद्धता की स्थिति पहले से ही खराब है।
इस बात की पुष्टि हाल में जारी एफएसएसएआई की रिपोर्ट स्टेट फूड सेफ्टी इंडेक्स 2020-21 में हुई है। जहां देश के 20 बड़े राज्यों में राजस्थान 38 अंकों के साथ 18वें नंबर पर है। 72 अंकों के साथ गुजरात इस इंडेक्स में पहले स्थान पर है। राजस्थान की कुल आबादी गुजरात से 13.5% ही अधिक है। मौजूदा समय में गुजरात में लगभग 300 एफएसओ हैं, राजस्थान में यह संख्या केवल 50 है। आबादी में पीछे होने के बावजूद गुजरात में राजस्थान की तुलना में 500% अधिक एफएसओ कार्यरत हैं। मैन पावर की कमी की वजह से भी राज्य फूड सेफ्टी इंडेक्स में पिछड़ा है।
पहली बार 2019 में एफएसओ के पदों के लिए निकली सीधी भर्ती
प्रदेश में एफएसएसआई एक्ट लागू होने से पहले फूड सेफ्टी ऑफिसर्स की संख्या 90 थी। फूड सेफ्टी ऑफिसर्स के पदों को भरने के लिए राजस्थान में पहली बार खाद्य सुरक्षा अधिकारी भर्ती के लिए आरपीएससी द्वारा 25 नवंबर 2019 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। इससे पहले हेल्थ डिपार्टमेंट के प्रोफेशनल्स को ही तीन महीने की ट्रेनिंग देकर एफएसओ चुन लिया जाता था। इस भर्ती की लिखित परीक्षा का परिणाम 13 मार्च 2020 को घोषित किया गया। कुल 98 पदों के लिए 300 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया गया। लेकिन दो साल बाद भी इनके इंटरव्यू नहीं हो पाए हैं। वर्ष 2020 में 23 से 30 सितंबर के बीच इंटरव्यू होना था लेकिन कोविड का हवाला देते हुए इसे स्थगित कर दिया गया। इंटरव्यू कब आयोजित होगा इसकी तिथियों की घोषणा आरपीएससी की तरफ से नहीं की गई है।
हर परीक्षा की फॉर्म फिलिंग में ही योग्यता भरना अनिवार्य
फूड सेफ्टी कमीश्नर डॉ. के. के. शर्मा के मुताबिक ‘लिखित परीक्षा में पास कुछ छात्र ऐसे हैं जो इस परीक्षा के लिए योग्यता नहीं रखते। ऐसे में यह मामला कोर्ट पहुंच गया’। विज्ञापन में योग्यता स्पष्ट रूप से दिए जाने के बावजूद ऐसे उम्मीदवार कैसे चयनित हुए जो एलिजिबल नहीं थे। भास्कर ने आरपीएससी का पक्ष जानने के लिए अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन इस विषय में कोई जवाब नहीं मिला।
3 सालों से गुजरात फूड सेफ्टी इंडेक्स में पहले स्थान पर है इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां सैंपलिंग अधिक होती है। साथ ही मैन पावर भी अधिक है। -डॉ. एच.जी कोशिया,- फूड सेफ्टी कमीश्नर, गुजरात
यूपी, हरियाणा जैसे राज्यों में तो लैब भी नहीं हैं। हमारे यहां 11 लैब फंक्शन में हैं। राज्य के सभी जिलों में लैब बनाने की तैयारी चल रही है। -डॉ. के.के. शर्मा, फूड सेफ्टी कमीश्नर, राजस्थान

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