ज्योतिषी डॉ. रोशनलाल बाली
ऋषिकेश राजोरिया
दंगों के दौरान एमएलए होस्टल में डॉ. रोशनलाल बाली आए, जो हिमाचल प्रदेश के सुंदर नगर के निवासी हैं और बड़े ज्योतिषी हैं। विधायक प्रकाश मेहता उनका बहुत सम्मान करते थे। आपातकाल में उन्होंने जेल भी काटी थी। वे कुछ दिन बंबई में रहकर गए और हमको बहुत कुछ सिखाकर गए। खास तौर से वह प्रसंग कभी नहीं भूला जा सकता, जब भरत टायलेट में अखबार लेकर घुस जाता था। उन्होंने उसे समझाया कि टायलेट अखबार पढ़ने की जगह नहीं है। पढ़ने लिखने का काम साफ सुथरे वातावरण में होना चाहिए। बाद में उन्होंने राहुल देव से भी मुलाकात की। वे हमारे साथ एमएलए होस्टल में कई दिन रहे। उनसे मिलकर राहुल देव भी काफी प्रभावित हुए। ज्योतिष से संबंधित उनके लेख जनसत्ता में छपे। तब तक मुझे ज्योतिष की ज्यादा जानकारी नहीं थी। डॉ. बाली ने मेरी जन्म पत्री का भी अध्ययन किया। उन्होंने मुझे भृगु संहिता के बारे में बताया। भृगु संहिता में विश्व के प्रत्येक व्यक्ति की जन्म पत्री उपलब्ध है।
महर्षि भृगु ने इसकी रचना की थी। हर व्यक्ति का जीवन राशि चक्र के आधार पर तय होता है। पूरा सौर मंडल बारह राशियों में विभाजित है। बारह राशियों के सत्ताईस नक्षत्र हैं। हर व्यक्ति का जन्म किसी एक राशि में होता है। वह उसकी लग्न राशि होती है। जिस राशि में चंद्रमा हो, वह चंद्र राशि होती है। बारह राशियों में नौ ग्रहों की स्थिति होती है। ग्रहों की युति, स्थिति के आधार पर जीवन का मार्ग तय होता है। कोई ग्रह प्रबल होता है, कोई कमजोर होता है। डॉ. बाली से जानकारी मिली कि भृगु संहिता के पन्ने दो तीन स्थानों पर हैं। पंजाब के होशियारपुर में पंडित जयदेव शास्त्री के पास और राजस्थान में भीलवाड़ा जिले में पंडित नाथूराम व्यास के पास। जयदेव शास्त्री का निधन हो चुका है। उनकी जगह उनके पुत्र सुनील भृगु संहिता के आधार पर फलादेश करते हैं।
डॉ. बाली का दावा है कि भृगु संहिता में सबकुछ स्पष्ट हो जाता है कि व्यक्ति कहां से आया, किसके घर जन्म लिया, उसकी जीवन यात्रा कैसी रही, उसका निधन कब होगा और निधन के बाद उसकी क्या गति होगी। डॉ. बाली ने जयदेव शास्त्री के पास से मेरा फलादेश भी मंगवाया था, जिसमें कहा गया था कि इस जातक का संपादक बनने का योग है। हालांकि अब तक वह योग आंशिक रूप से ही पूरा हो पाया है। लेखक, अनुवादक, समीक्षक, उप संपादक, संवाददाता तो मैं बन गया, लेकिन संपादक बनना अभी बाकी है।
डॉ. बाली मंत्रों के भी ज्ञाता हैं। उनका कहना था कि हर राशि का विशेष मंत्र होता है। संबंधित राशि का व्यक्ति यदि उससे संबंधित मंत्र सिद्ध कर ले तो उसके जीवन से तमाम नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। डॉ. बाली आपातकाल के दौरान जेल में भी रहे थे। उनकी कई नेताओं से जान पहचान है, जिनमें भाजपा के नेता ज्यादा हैं। बाद में उन्होंने सुंदर नगर में ज्योतिष शोध संस्थान शुरू कर दिया था, जो अब भी है। भरत पंडित से उनकी पुरानी जान पहचान थी और विधायक प्रकाश मेहता भी उनका बहुत सम्मान करते थे। देश में चल रहे घटनाक्रम से डॉ. बाली विचलित थे। दंगों के कारण बंबई का माहौल बिगड़ गया था। पूरे देश में अशांति का वातावरण था। इस परिस्थिति में डॉ. बाली ने त्र्यंबकेश्वर जाकर शांति के लिए अनुष्ठान भी किया था। उसके बाद बंबई की स्थिति सुधरने लगी थी। उन्होंने संझा जनसत्ता के लिए वार्षिक भविष्यफल भी लिखा था। दरअसल डॉ. बाली मेरे लिए मार्गदर्शक की भूमिका में थे।


0 टिप्पणियाँ