ब्यूरो रिपोर्ट।
प्रदेश में बाघों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को समिति के गठन को मंजूरी देते हुए उसे बाघों के संरक्षण के लिए दीर्घकालीन कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ समिति में राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य और विधायक भरत सिंह कुंदनपुर, बोर्ड के सदस्य और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के पूर्व सदस्य सचिव डॉ राजेश गोपाल, सिमरत कौर संधू, सुनील मेहता, धीरेंद्र गोधा, जैसल सिंह, वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड इंडिया के महासचिव और सीईओ रवि सिंह, निदेशक भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के प्रतिनिधि और सदस्य सचिव और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रतिनिधि को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्रदेश के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समिति के संयोजक होंगे। आपको बता दें कि मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों हुई राज्य वन्य जीव मंडल की बैठक के दौरान प्रदेश में बाघों के बढ़ते कुनबे को देखते हुए उनके संरक्षण के लिए दीर्घकालीन कार्य योजना बनाने की दिशा में विशेषज्ञ समिति का गठन करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में बाघों की बढ़ती संख्या के अनुरूप उनको सुरक्षित आश्रय स्थल उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार नए टाइगर रिजर्व विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। बूंदी क्षेत्र के रामगढ़ वन्य जीव अभ्यारण को हाल ही में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए की ओर से टाइगर रिजर्व के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई है। गहलोत ने इस पर प्रसन्नता जताते हुए कहा था कि कुंभलगढ़ अभ्यारण सहित अन्य वन क्षेत्रों में भी बाघों के अलावा दूसरे वन्यजीवों के संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार प्रतिबद्ध रूप से काम करेगी।


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