उदयपुर से भगवान प्रजापत

जैन संत श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर जैन समुदाय के पर्युषण महापर्व की अवधि के दौरान बूचड़खानों के संचालन और मांस, मछली के क्रय-विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति अहिंसा प्रधान संस्कृति है। अहिंसा की इस महान संस्कृति को अल्पसंख्यक वर्ग का जैन समुदाय व्यापक रुप से पल्लवित करता है। जैन धर्म प्राणिमात्र के प्रति करुणा का उपदेश देता रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष सकल जैन समुदाय का पर्युषण महापर्व 3.9.2021 से 19.9.2021 तक है और इसी क्रम में 11 सितंबर को संवत्सरी महापर्व और 19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व है। जैन समुदाय में पर्युषण पर्व का विशेष महत्व है। देश-विदेश में पर्युषण पर्व तपस्या, अहिंसा और क्षमा की आराधना के साथ मनाया जाता है। श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र ने कहा कि पर्युषण महापर्व के दिनों में राज्य के समस्त बूचड़खाने और सभी प्रकार के मांस, मछली, अंडों वगैरह की दुकानों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष के राजा, राणा और मुगल शासक भी पर्युषण के दिनों में मांसाहार पर प्रतिबंध लगाते थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी कई राज्य सरकार और स्थानीय निकाय भी पर्युषण पर्व के संवत्सरी महापर्व और अनंत चतुर्दशी को पशु-वध और मासाहार के क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगाते हैं।