ब्यूरो रिपोर्ट।

मनुष्य जीवन की सार्थकता सिद्ध करने और जीवन के दौरान अपने कर्तव्य का यथोचित निर्वहन करने की दिशा में अद्भुत ज्ञान दर्शाने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण का आज जन्मोत्सव है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से कलयुग में श्री कृष्ण के अवतार को ही सर्वाधिक महत्व दिया गया है। भगवान श्री कृष्ण ने अपने जीवन काल के दौरान कई लीलाओं के जरिए मनुष्य को उसके कर्तव्यों का बोध कराया था। बालस्वरूप से लेकर यौवन काल और उसके बाद के जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ाव से उन्होंने मनुष्य जीवन की सार्थकता सिद्ध करके दिखाई थी। इसीलिए भगवान विष्णु के सभी अवतारों में श्री कृष्ण अवतार को जनमानस ने सर्वाधिक महत्व दिया है। इस बार भी अद्भुत संयोग के साथ आई श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन घर-घर में बालगोपालो को श्री कृष्ण स्वरूप में सजाया गया। शहर के सभी पोशाक केंद्रों पर 1 महीने पहले ही इस दिन के लिए बुकिंग हो गई थी। बाल गोपालों ने पीतांबरी धारण करने के साथ ही मोर मुकुट और बंसी लेकर श्री कृष्ण के बाल स्वरूप को साकार किया। अलसुबह से शुरू हुआ यह सिलसिला देर रात तक चलेगा। घर-घर में कृष्ण कन्हैया की पूजा होगी और फिर रात को शंखनाद और ढोल मंजीरा वादन के साथ भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। छोटी काशी के सभी मंदिरों में इस बार भी भव्य झांकियां सजाई जाएगी। आपको बता दें कि पिछले 2 साल से कोरोना महामारी की मार झेल रहे आम लोगों में अब धीरे-धीरे इस महामारी का खौफ हटने लगा है। इसीलिए तीज त्योहार के साथ ही हर सामाजिक और धार्मिक परंपरा अब पूरे उल्लास के साथ निभाई जा रही है।