प्रदेश की तीनों बिजली कंपनियां, जयपुर, जोधपुर व अजमेर डिस्कॉम पांच साल में दूसरी बार बड़े वित्तीय संकट से घिर गई हैं। तीनों पर 87 हजार करोड़ रुपए की देनदारियां हैं। ऐसे में कंपनियों ने अब ऑपरेशन एंड मेंटीनेंस (ओएंडएम) का मासिक बजट 126 करोड़ रु. से घटाकर 63 करोड़ रु. कर दिया है। सीधा असर 1.53 करोड़ उपभोक्ताओं की बिजली सर्विस पर पड़ेगा।
मेंटनेंस का बजट आधा होने से सुचारू बिजली में कटौती होगी। डिस्कॉम्स के चेयरमैन व ऊर्जा सचिव दिनेश कुमार की ओर से जारी आदेश में बजट आधा करने के साथ नए सामान व उपकरणों की खरीद करने पर अगले 3 माह तक के लिए रोक लगा दी गई है। ज्यादा जरूरी होने पर चेयरमैन की मंजूरी के बाद ही खरीद हो सकेगी। यानी अब सामान नहीं होने के कारण शिकायतों का समाधान नहीं होगा। फॉल्ट जल्दी नहीं सुधरेंगे। नए कनेक्शन मिलने में भी देरी होगी। शेष | अंतिम पेज पर
असर : बिजली बिल सुधारने और नए उपकरण खरीदने जैसी सुविधाओं का कनेक्शन कटेगा
ऑपरेशन एंड मेंटीनेंस से पूरा बिजली तंत्र और कंपनी संचालित हो रही हैं। इनमें चार बड़े खर्चे जुड़े हैं- बिजली खरीद, स्टाफ की सैलरी, लोन की किस्तें व अन्य खर्च। बजट आधा करने से बिजली खरीद, लोन किस्त व सैलरी रोक नहीं सकते। ऐसे में 33 केवीए, 11 केवीए व एलटी ट्रांसमिशन लाइन, जीएसएस, उपभोक्ता लाइनों का मेंटनेंस प्रभावित होगा।
तीनों कंपनियों के कस्टमर केयर सेंटर, एफआरटी सेंटर्स के बिल अटकेंगे तो सीधे तौर से शिकायत व फाल्ट देरी से ठीक होंगे। लोड बढ़ने या हादसा होने की स्थिति में नए सामान के बिना बिजली सप्लाई सुचारू करना मुश्किल हो जाएगा। इस बार आधे से ज्यादा राजस्थान में कम बारिश होने से बिजली की मांग बढ़ी हुई है, ऐसे में मेंटनेंस के अभाव में तंत्र फेल हो सकता हैं।
सरकार ने इस साल 70 हजार से ज्यादा कृषि कनेक्शन जारी करने का लक्ष्य दिया है। सामान न मिलने से घरेलू, वाणिज्यिक व इंडस्ट्री कनेक्शन जारी होने में देरी होगी। सबसे अधिक परेशानी घरेलू कनेक्शन लेने में आएगी।
घाटे का फ्लक्चुएशन : 5 साल पहले 60 हजार करोड़ एडजस्ट, फिर 87 हजार करोड़ चढ़ाए
तीनों डिस्कॉम पर 2015 में 80 हजार करोड़ रु. की देनदारी थी। तब केंद्र ने इसमें से 60 हजार करोड़ रु. का घाटा समायोजित किया। 20 हजार करोड़ रु. की देनदारी ही बची थी, लेकिन कोयले की महंगी बिजली खरीदने, लोन की किस्तें चुकाने के लिए डिस्कॉम को लोन लेने पड़े। सब्सिडी के पेटे 50 हजार करोड़ रुपए सरकार चुका नहीं पा रही है। कोरोना में वसूली भी अटक गई। अब देनदारी 87 हजार करोड़ रु. तक बढ़ गई।



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