सिरोही से गणपत सिंह मांडोली की रिपोर्ट। 

आपके प्रभाव वाले इलाके में अगर कोई "दूसरा" बड़ी कार्रवाई कर जाए तो आपका असहज होना स्वाभाविक हैं, पर उसकी प्रतिक्रिया के लिए अगर आप झूठ का सहारा लेने लग जाए तो किरकिरी कम होने की बजाए बढ़ना लाजमी हैं। आजकल यही हाल सिरोही जिला पुलिस के है, और विशेष तौर पर सिरोही एसपी हिम्मत अभिलाष टांक की किरकिरी जग जाहिर होती जा रही हैं। दरअसल शनिवार-रविवार की मध्यरात्रि राजस्थान आबकारी आयुक्त डॉ जोगाराम की विशेष टीम ने सिरोही जिले के रोहिड़ा थाना क्षेत्र में दबिश देकर शराब के अवैध काले कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए 1880 कार्टून शराब की बड़ी खेप के साथ 11 आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही कुल 15 वाहनों को जब्त करने की हुई कार्रवाई ने सिरोही जिले की पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया था। जिसके चलते इस पूरी कार्रवाई के बाद जिले के एसपी सहित तमाम जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली थी। लेकिन इस कार्रवाई के बाद जिले सहित पूरे प्रदेश में एसपी हिम्मत अभिलाष टांक के भ्रष्ट आचरण को लेकर खूब थू थू हुई। और इसी जख्म पर मरहम लगाने के लिए सिरोही एसपी हिम्मत अभिलाष टांक ने पूरे दिन सोच विचार के बाद एक झूठी कहानी गढ़कर अपनी साख बचाने का ऐसा नायाब तरीका ढूंढा कि जख्म भरने की बजाए और गहराता चला गया। मामला यह हैं कि रविवार की रात्रि में आबकारी आयुक्त की विशेष टीम की उस बड़ी कार्रवाई के बदले में सिरोही एसपी ने सरूपगंज थाना क्षेत्र में एक ऐसी मनगढंत कार्रवाई को अंजाम दिलवा दिया, जिस पर यकीन करना किसी के भी गले नही उतर रहा।  रविवार की शाम तक मीडिया के सवालों पर कोरोना ड्यूटी का रोना रोने वाले एसपी हिम्मत अभिलाष टांक सोमवार की अल सवेरे मीडियाकर्मियों को सामने से फोन कर अपनी पीठ थापठापने के लिए कॉल पर कॉल किए जाते नज़र आए। एसपी मीडियाकर्मियों को सनसनीखेज खबर देते हुए बताने लगे कि आबकारी आयुक्त की टीम ने 15 वाहनों की जब्ती के बाद जितनी शराब नही पकड़ी उतनी शराब सरूपगंज थाना पुलिस ने मात्र एक कन्टेनर पकड़ कर ही जब्त कर ली। यानी सरूपगंज थाना पुलिस ने रविवार-सोमवार की मध्य रात्रि में 1705 कार्टन हरियाणा निर्मित अवैध शराब के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार करने की कार्रवाई को अंजाम दिया हैं।

 आखिर 24 घण्टे से भी कम समय मे पुलिस ने कैसे कर ली कार्रवाई?

कहानियां बनाना तो कोई सिरोही एसपी हिम्मत अभिलाष टांक से सीखे। कुछ महीने पहले पालड़ी एम थाना क्षेत्र के वेरा विलपुर स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर के महंत की हत्या का प्रकरण तो आप सब को याद ही होगा। मोहब्बतनगर में एक मंदिर में चोरी की वारदात को अंजाम देते युवकों को ग्रामीणों ने पकड़कर कालंद्री थाना पुलिस को सुपुर्द करना और उसके बाद उन्ही चोरों को पालड़ी एम थाना क्षेत्र के पिपलेश्वर महादेव मंदिर के महंत का हत्यारा बताकर आबूरोड़ से गिरफ्तार करने की वो झूठी कहानी भी आपको खूब याद होगी। जिसको लेकर हमने पूरा खुलासा भी किया था। कुछ ऐसा ही मामला आज भी देखने को मिल रहा हैं। सिरोही एसपी जिस कन्टेनर में हरियाणा से शराब भरकर आना बता रहे हैं, दरअसल वो कन्टेनर पिछले कई महीनों से सिरोही जिले की सीमा छोड़कर बाहर ही नही गया। एसपी हिम्मत अभिलाष टांक और उनके मातहत थानाधिकारी जिस कन्टेनर को हरियाणा से गुजरात जाने का बताकर पकड़ने की वाहवाही लूटना चाह रहे हैं, वो कन्टेनर रविवार को ही दोपहर 12 बजकर 8 मिनिट और 33 सेकेंड पर आबूरोड़ की तरफ से उड़वादिया टोल प्लाजा होते हुए सरूपगंज की तरफ जाने की पुष्टि टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज और टोल प्लाजा पर चुकाए टोल टैक्स की रसीदें कर रही हैं। जब ये कन्टेनर दोपहर के 12 बजे उड़वादिया टोल से निकला तो फिर वो ही कन्टेनर रात को 11 बजे हरियाणा से शराब बहकर पुनः सरूपगंज कैसे पहुंच गया। और सबसे बड़ी हैरानी की बात तो ये हैं कि सरूपगंज से आगे ये कन्टेनर ना तो उथमण टोल प्लाजा को क्रॉस करता हैं, और ना ही मालेरा टोल को क्रॉस किया जाता हैं। फिर ये कन्टेनर हरियाणा कैसे पहुंचा, इसका जवाब तो सिरोही एसपी और उनकी टीम ही दे सकती हैं। सिर्फ आजकल ही नही पिछले तीन महीनों के रिकॉर्ड भी उठाकर देखे तो इस कन्टेनर ने सिरोही जिले की सीमा को कभी क्रॉस ही नही किया। और इसके बावजूद इस कन्टेनर ने पिछले एक महीने में सरूपगंज के उड़वादिया टोल को 12 बार अपडाउन क्रॉस किया। यानी ये कन्टेनर सरूपगंज कस्बे के इर्दगिर्द ही घूमता रहा और एक जगह से दूसरी जगह पर शराब की खेप इधर उधर करता रहा। विश्वस्त सूत्र बता रहे हैं कि सरूपगंज थाना क्षेत्र के इसरा के आसपास शराब माफिया का बड़ा गोदाम हैं, जहाँ हरियाणा निर्मित शराब का बड़ी मात्रा में स्टॉक कर रखा हुआ हैं। जहाँ से इस कन्टेनर में शराब भरकर रोहिड़ा थाना क्षेत्र के भीमाणा भारजा के बीच स्थित एक कृषि कुएं तक पहुंचाया जाता था, जहाँ से छोटी गाड़ियों में क्रॉसिंग देकर पूरी खेप गुजरात पहुंचाई जाती थी। जिसमें सिरोही पुलिस अधीक्षक से लेकर सरूपगंज और रोहिड़ा थाना पुलिस की भी पूरी तरह से सहभागिता थी। जिसके चलते ये अवैध गोरखधंधा पिछले 8 महीने से संचालित हो रहा था। पर पिंडवाड़ा विधायक समाराम गरासिया के एक ट्वीट ने इस पूरे गोरखधंधे का भंडाफोड़ कर दिया और आबकारी आयुक्त को इस पर संज्ञान लेते हुए रविवार को अवैध शराब परिवहन करने के जुर्म में 15 गाड़ियों सहित 11 आरोपियो को गिरफ्तार करना पड़ा था। और उस कार्रवाई के बाद अपनी साख बचाने के लिए एसपी ने एक मन घड़ंत कहानी रचकर मात्र 24 घण्टे के भीतर भीतर सोमवार को इस कन्टेनर को जब्त कर वाहवाही लूटने का प्रयास किया गया।


 एसपी की साख बचाने के लिए हर बार छगन डांगी ही क्यों आते हैं आगे?

सिरोही एसपी हिम्मत अभिलाष टांक की कार्यप्रणाली को लेकर जब जब सवाल उठने लगते हैं, तब तब हर बार एक झूठी कहानी लेकर कार्रवाई करने के लिए पुलिस उप निरीक्षक छगन डांगी सामने आ जाते हैं। आखिर एसपी हिम्मत अभिलाष टांक और उप निरीक्षक छगन डांगी की इस जुगलबंदी के पीछे का राज क्या हैं? किसी के समझ नही आ रहा हैं। पालड़ी एम थाना क्षेत्र के पिपलेश्वर महादेव मंदिर के महंत की हत्या के बाद क्षेत्र में आरोपियो की गिरफ्तारी को लेकर जब हिन्दू संगठनों ने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाया तो एसपी हिम्मत अभिलाष टांक ने एक झूठी मनगढंत कहानी के सहारे आरोपियों को पकड़ने की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक छगन डांगी को सौंपी। और कालंद्री थाना क्षेत्र के मोहब्बतनगर के ग्रामीणों द्वारा पकड़े चोर को पालड़ी एम थाना क्षेत्र के पिपलेश्वर महादेव मंदिर के महंत का हत्यारा बताकर उसे छगन डांगी के हवाले किया गया। जिसे उपनिरीक्षक छगन डांगी ने आबूरोड़ क्षेत्र से गिरफ्तार बताकर पूरी मनगढंत कहानी को अपना अचीवमेंट बताकर पेश किया। इसी प्रकार जब रविवार को पांच जिलों की संयुक्त आबकारी टीम ने रोहिड़ा थाना क्षेत्र में अवैध शराब का भारी जखीरा पकड़ा तब भी डैमेज कंट्रोल करने के लिए फिर से एक झूठी कहानी रचकर उसी उपनिरीक्षक छगन डांगी को आगे करते हुए मात्र 24 घण्टों के भीतर भीतर शराब की दूसरी कार्रवाई को अंजाम देकर साख बचाने का प्रयास क्या संकेत देता हैं।


 आखिर एसपी को गुजरात बॉर्डर से क्यों हैं इतना लगाव?


वर्ष 2009 में आरपीएस से आईपीएस बने हिम्मत अभिलाष टांक को गुजरात बॉर्डर से सटे जिलों में एसपी रहने का विशेष लगाव हैं। तभी तो पहले डूंगरपुर, फिर जालोर और अब सिरोही जिले में बतौर एसपी ड्यूटी निभा रहे हैं। आखिर एसपी हिम्मत अभिलाष टांक का सीमावर्ती जिलों से इतना लगाव क्यों हैं? आज हर किसी के मन में सवाल हैं। आपको बता दें गुजरात राज्य में शराब बंदी के चलते राजस्थान के इन सीमावर्ती जिलों से गुजरात में भारी मात्रा में अवैध शराब की तस्करी जग जाहिर हैं। फिर चाहे वो डूंगरपुर जिला हो, जालोर जिला हो या फिर सिरोही जिला। यहां से शराब माफियाओं द्वारा अवैध शराब का बड़ा कारोबार चलाया जाता हैं। जिनसे हर महीने बड़ा कमीशन पुलिस अधिकारियों को दिया जाता हैं ताकि उनके इस काले कारोबार में पुलिस रोड़ा ना बने। 

 विवादों से एसपी टांक का पुराना रिश्ता


हिम्मत अभिलाष टांक सरल व्यक्तित्व के आईपीएस अधिकारी माने जाते रहे है, लेकिन जालोर में इनका कार्यकाल खूब विवादित रहा। सांचौर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दौरे के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से एसपी के विरुद्ध शिकायत की गई थी। इसी प्रकार कोरोना लॉक डाउन के दौरान नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की ओर से ट्वीट करके जालोर एसपी की मुख्यमंत्री से शिकायत करना, बागोड़ा डोडा प्रकरण में थाने पर डोडा पोस्त में खरीद फरोख्त के आरोप के बाद उच्च स्तर से जांच शुरू होने आदि मामले में शामिल है। इसी प्रकार जिलेभर में अवैध बजरी खनन मामलों में एकतरफा कार्रवाई करने के भी कई आरोप लगे।