सम्पादकीय
मीडिया बड़े गर्व से आपको बताता है कि कैसे भारत का परचम पूरे विश्व में लहरा रहा है और आप भी उससे दोगुने गर्व से उस खबर को पचा लेते हैं। पता नहीं क्यों पर साक्षरता और पढाई के स्तर में सुधार होने बावजूद भारतीय लोग किसी भी समाचार (मुख्य धारा में प्रकाशित) को यूँ ही सच मान लेते हैं जैसे हमारे पीएम की बोली हर बात। अब कोविड को ही लीजिए। क्या इससे बड़ी विपदा या खबर विगत मार्च के बाद कोई भी रही है ? निःसंदेह नहीं। हमारी केंद्र सरकार ने आरोग्य सेतु एप्प निकाल दिया और उसे कई जगह जरुरी भी कर दिया।
करोड़ों ने डाउनलोड भी किया। अब यह एप्प कितनी भारतीय भाषाओँ में उपलब्ध है ? इस पर सरकार की चुप्पी तो समझ में आती है पर मुख्य धारा क ऍम मीडिया ? बहरहाल ये सिर्फ सरकार और मीडिया को तोहमत देने के लिए नहीं है सो असल मुद्दे पर आते हैं। हमारी सरकार ने बड़े प्रचार के बीच दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया और इसके लिए कोविन (COWIN) एप्प निकाल दिया। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संरक्षित इस एप्प के ज़रिए ही कोई भी भारतीय नागरिक देश के टीकाकरण अभियान का हिस्सा बन सकता है। यानि कोविन बगैर टीका नहीं। यह एप्प भी पहले के एप्प की तरह अंग्रेजी जानने वालों को ध्यान में रखकर बनाया गया। यानि यदि भारत में अंग्रेजी और हिंदी नहीं आती और गलती से आप मराठी, बांग्ला, पंजाबी, तमिल, कन्नड़ या अन्य किसी भी भाषा में चाहे पीएचडी ही क्यों ना हों यह एप्प आपकी मदद नहीं करेगा।
अब जब ढाई करोड़ हिन्दुस्तानी कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं तो भारत सरकार ने यह बताया है कि कोविन एप्प अगले हफ्ते तक भारतीय भाषाओँ में उपलब्ध होगा। अब जरा सभी अपना अपना अखबार टटोलिए। किस किस अखबार ने आपको यह खबर बताई ? जैसे भारत सरकार आपको समझती है वैसे ही ये मुख्य धारा के मीडिया वाले भी समझते हैं।
एक बात स्पष्ट समझिए, यह सूचना का युग है। आपक अपनी सूचना कहाँ से ले रहे हैं - यह बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। जब सरकार को पता है है कि उसकी गलती जनता तक पहुंचेगी ही नहीं तो वो भी ढाई करोड़ संक्रमण होने तक चादर तान कर सो सकती है।


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