ब्यूरो रिपोर्ट!
पिछले कई दिनों के बाद प्रदेश में कोरोना से पीड़ित मरीजों का ग्राफ उतार की ओर नजर आया। एक दिन में 18000 से ऊपर जा रहा पॉजिटिव केस का आंकड़ा पिछले 2 दिन के अंतराल में लगभग 2000 नीचे 16815 पर ठहर गया। कुल संक्रमित मरीजों के लिहाज से देखा जाए तो बुधवार का दिन एक बहुत बड़ी राहत की खबर लाया जिसमें संक्रमित मरीजों के मुकाबले रिकवर हुए मरीजों की संख्या ज्यादा रही। यानी संक्रमित मिले 16815 और रिकवर हुए 17022 । राजस्थान सरकार की ओर से चलाए जा रहे रेड अलर्ट जन अनुशासन पखवाड़े के तहत आम जनता के साथ-साथ अब तक हाशिए पर चढ़े रहे चिकित्सा विभाग को भी इस रिपोर्ट ने संजीवनी दे दी और प्रदेश के चिकित्सा मंत्री ने इसे हाथों हाथ लेकर सरकार की अनुशंसा में प्रेस रिलीज भी जारी कर दिया जिसमें कुल संक्रमित मरीजों के मुकाबले रिकवर हुए मरीजों को हाईलाइट करते हुए सरकार के प्रयासों को कारगर साबित करने का प्रयास किया गया है। अच्छी बात है इस मामले में पॉजिटिव होना भी चाहिए। और बुधवार के आंकड़े भी सरकार को संजीवनी दे रहे हैं। लेकिन ये भी गौर करना चाहिए कि जहां हम कमजोर हैं, वह बात भी उजागर होनी चाहिए। उदयपुर संभाग पिछले कई दिनों से संक्रमित मरीजों की दिशा में 1000 से नीचे चल रहा था। वहां अचानक क्या हुआ कि बुधवार के दिन संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 1452 तक चला गया। पिछले 3 दिन की बात अगर हम देखें। सरकारी आंकड़ों के लिहाज से प्रदेश में रोजाना 150 से ऊपर मौत हो रही है। पिछले 2 दिन से तो 154 और आज 155। यह आंकड़ा सामने आ रहा है जबकि आम जनता भी अब जानने लग गई है कि सरकारी आंकड़ों में और हकीकत में दिन रात का अंतर होता है। तो क्या हम इस बात से निश्चिंत हो जाए कि जो आकडों के लिहाज से थोड़ी बहुत राहत हमें मिली है,वो क्या सही मायने में राहत की बात है। नहीं! जिस दिन प्रदेश का आंकड़ा इस महामारी के ग्राफ में शून्य होगा, सबसे बड़ी राहत उसी दिन मिलेगी। यह बात नहीं है कि आम जनता सरकार का सिर्फ विरोध ही कर रही है। आमजन ने भी इस महामारी की भयावह स्थिति को अब समझना शुरू कर दिया है। और शिक्षित वर्ग यह बात बखूबी जान गया है कि चाहे केंद्र हो या राज्य सरकार! जिस रफ्तार से यह महामारी बढ़ रही है उसको रोकने की दिशा में सिर्फ और सिर्फ आम जनता ही सबसे बड़ा कारगर उपाय साबित हो सकती है। क्योंकि सरकारों ने अपने भरसक प्रयास किए हैं लेकिन वही बात, यदि एक ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए सौ लोग अपनी जरूरत के लिए खड़े हो तो उसमें सरकार क्या करें? यानी सीधे समझने की बात यही है। समस्या बहुत गंभीर है और समाधान अभी सीमित है। खैर धीरे धीरे। हम इस महामारी से निजात पाई जाएंगे यही उम्मीद है आज हम आपको प्रदेश के आंकड़े इसीलिए नहीं दे रहे कि अब हमें इंतजार तो बस इसी बात का है कि इस के ग्राफ में निरंतर कमी हो। और ईश्वर करें। आप हम? और हम सब प्रदेश वासी। के साथ हमारे देशवासी भी। इस महामारी की जकड़ से जल्द से जल्द मुक्त हो। और पहले की तरह हमारी जीवनधारा अविचल रूप से बहने लगे।


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अविचल
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