ब्यूरो रिपोर्ट। 

लॉकडाउन और वैट की अधिकता के चलते प्रदेश में पेट्रोल डीजल की बिक्री में 24 फ़ीसदी से अधिक की कमी आई है। ऐसे में लगातार बढ़ते पेट्रोलियम के दाम न केवल आम जनता को वरन पेट्रोलियम डीलर्स को भी भारी पड़ रहे हैं। लगातार बढ़ते निवेश और घटते मार्जिन के चलते डीलर परेशानी में आ गए हैं। वहीं राज्य सरकार को भी बिक्री घटने से वैट के रूप में करोड़ों रुपए की हानि उठानी पड़ रही है। दरअसल राज्य में 7200 से अधिक पेट्रोल पंप हैं। प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़ने के बाद जब जन अनुशासन पखवाड़े की शुरूआत की गई तभी से आम नागरिकों के लिए पेट्रोल पंप से पेट्रोल डीजल लेने की अवधि सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक तय कर दी गई। इधर पिछले 14 महीने में पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ाए जाने से भी बिक्री प्रभावित हुई है। पेट्रोल राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के जिलों में ₹100 के स्तर को पार कर चुका है वहीं डीजल भी ₹93 से ज्यादा की दर पर बिक रहा है। जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा व अन्य राज्यों में राजस्थान के मुकाबले पेट्रोल और डीजल 8 से ₹10 तक सस्ते हैं। ऐसे में प्रदेश के बाहर से आने वाले वाहन राजस्थान की अपेक्षा पंजाब हरियाणा से डीजल भड़ाना पसंद कर रहे हैं। इससे राज्य में पेट्रोल डीजल की बिक्री में भारी कमी आई है। सरकार को भी प्रतिदिन 15 करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मामले में व वेट स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र सिंह भाटी का कहना है कि प्रदेश में पेट्रोलियम का बिजनेस अब फायदे का सौदा नहीं रहा।