जीत के बाद
राम ने
दे दिया था
क्षमा का दान
रावण द्वारा माँगे जाने पर
और
भेज दिया था
पूरे खुले मन से
लक्ष्मण को
नीति-ज्ञान लेने
रावण के ही पास
जीत के बाद
अशोक
चले गये थे
बुद्ध की शरण में
जीत के बाद
शेरशाह ने
कर लिया था स्वीकार
कि
गँवाने वाला था वो
अपना तख़्त
एक मुट्ठी बाजरे के लिये
जीत के बाद
सराहा गया था
हार के सही तेवर को
सिकन्दर द्वारा
जीत के बाद
हमेशा ही दी गयी है
बलि
जीतने वाले द्वारा ही
उन सभी घोड़ों की
जो निकले थे
अश्वमेघ के लिये
जीत के बाद
हारने वाले का
व्यवहार ही तय करता है
कि
कैसा होगा मौसम
जीतने वाले के मन का
लेकिन हम
नहीं सीख पाये
आज तक
हार को
शालीनता और सच्चाई से
स्वीकार करना
जो न सिर्फ़ बताती है
बल्कि
तय भी करती है
कि
कितना माद्दा है हममें
गरिमापूर्वक पचाने का
जीत को
जीत के बाद !
लोकेश कुमार सिंह
(लेख में प्रस्तुत विचार लेखक के अपने हैं। Rajkaj.News की इन विचारों से सहमति अनिवार्य नहीं है। किंतु हम अभिव्यक्ति की स्वंत्रता का आदर करते हैं।)


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