ब्यूरो रिपोर्ट!

प्रदेश में मंगलवार का दिन हाहाकार की स्थिति सामने लेकर आया। हनुमान जयंती का दिन था और उस दिन जो खबरें सामने आई उसे देखकर हर किसी का दिल चीत्कार कर उठा। कोरोना के इतिहास में एक तरह से यह दिन काल के रूप में साबित हुआ। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मौतों का ग्राफ एक दिन में ही 121 लोगों की सांसे थमने की रिपोर्ट के साथ हुआ। इसमें जोधपुर में 22, जयपुर में 21, उदयपुर में 14, बीकानेर में 8, कोटा में 6 सीकर में 6 और पाली में 5 लोगों सहित कई जिलों में मरीजों के सांसे टूटने का सिलसिला सामने आया। अब यह कहने की बात नहीं है कि यह सिर्फ सरकारी आंकड़े हैं। असलियत क्या है यह तो ईश्वर जानता है और या केंद्र और राज्य सरकारें जानती हैं। हम पिछले कई दिनों से मीडिया में यह खबरें देख भी चुके हैं। पढ़ भी चुके हैं कि केंद्र हो चाहे राज्य। मौतों के मामले में दोनों सरकारी आंकड़ों को छुपाने के भरसक प्रयत्न करती है। लेकिन जो एक भयानक मंजर आंकड़ों में भी आ रहा है, उसे देखकर साफ लग रहा है कि हम कोरोना की दूसरी लहर के आगे इंतजाम की दिशा में बिल्कुल फिसड्डी साबित हो रहे हैं। जितनी भी मौतें हुई है उनके पीछे कोई ना कोई कमी एक महत्वपूर्ण कारण बनी है। 



अब वह चाहे बैड नहीं मिला हो, समय पर ऑक्सीजन नहीं मिली हो या समय पर उचित देखभाल नहीं हुई हो। देखा जाए तो राज्य सरकार को इस दिशा में और भी कड़े कदम उठाने की जरूरत है। अभी तक राजस्थान में इस महामारी से 3806 यानी लगभग 4000 मौतें सरकारी आंकड़ों के अनुसार हो चुकी है वहीं मंगलवार के दिन तक कुल पॉजिटिव केस 155182 तक पहुंच चुके हैं जो कि वास्तव में चिंताजनक बात है। मंगलवार को आए प्रदेश के पॉजिटिव आंकड़ों की बात की जाए तो इस दिन कुल 16089 पॉजिटिव मरीज पाए गए। जयपुर में 3289, जोधपुर में 1924, अलवर में 1358, उदयपुर में 881, सीकर में 750, कोटा में 701, अजमेर में 630, और पाली में 501 पॉजिटिव केस सामने आए।  आपको बता दें कि कोरोना की बढ़ती रफ्तार को रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से उठाए गए जन अनुशासन पखवाड़े का चौथा दिन था। और देखा जाए तो तमाम बंदिशों के बावजूद यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अब हालात यह है कि इधर गिरे तो कुआं उधर गिरे तो खाई। यानी आंशिक लॉकडाउन ने जहां राज्य सरकार के राजस्व को एक तरह से निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। वहीं दूसरी ओर लोगों की आजीविका भी अब फिर से खतरे में पड़ने लगी है। अब यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर करे तो क्या करें?