पाली से मनोज शर्मा की खबर। 

बांगड अस्पताल जहां आकर मरीजों को राहत मिलनी चाहिए वह इनके लिए आफत बनता जा रहा है। यहां बेड की कमी के चलते समय पर उपचार शुरू नहीं होने से प्रतिदिन किसी ना किसी की मौत होना अब आम बात हो गई है। और तो और प्रदेश का यह शायद पहला अस्पताल हैं, जहां पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध होने के बावजूद अव्यवस्थाओं के चलते मरीजों की जान जा रही है।



 आज भी जब गंभीर मरीजों तक ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं पहुंचे तो पार्षद विकास बुबकिया एवं अन्य जनप्रतिनिधि स्वयं ये सिलेंडर मरीजों तक लेकर गए। यहां अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि मरीज के परिजनों को गंभीर मरीज को भर्ती करवाने के लिए ओपीडी और कोविड वार्ड के बीच चक्कर कटवाए जाते है, और इस दौरान मरीज की मौत हो जाती है। 



बांगड अस्पताल की इन्ही अव्यवस्थाओं के चलते चारणियों का बास निवासी 65 वर्षीय तारादेवी की उपचार के अभाव में मौत हो गई। मृतका के परिजनों को ऑटो से अस्पताल पहुंचने पर 15 मिनट तो ऑटो को ट्रॉमा सेंटर और ओपीडी के बीच घुमाया गया। इसके बाद उसे स्ट्रेचर नसीब नहीं हुआ, और जब स्ट्रेचर मिलने पर उसे अंदर ले जाया गया तब तक वृद्धा की जान चली गई। 



इन परिस्थितियों में यह साबित हो रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भले ही चिकित्सा व्यवस्थाओं की दुरस्त करने के लिए नित नए दिशा निर्देश दे रहे हैं, पर जिम्मेदार इन निर्देशों की पालना के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं, जिसके चलते पर्याप्त ऑक्सीजन की उपलब्धता के बावजूद मरीजों की जान जा रही है।



 अस्पताल में ली गई एक एक तस्वीर खुद हजार कहानी बयान कर रही है।  कोरोना की महामारी से सहमे लोगों की आँखों में अब कोविड का डर कम, बांगड़ अस्पताल की अव्यवस्थाओं का खौफ ज्यादा है।