जालौर. दिन-ब-दिन सामने आ रही नई तकनीक ने जहां एक और मानव जीवन की कई सुविधाओं को आसान कर दिया, वहीं कई दुश्वारियां भी खड़ी कर दी। टेक्नोलॉजी का फायदा अब शातिर अपराधी बखूबी उठा रहे हैं और तो और यह प्रवृत्ति अब छोटे-छोटे कस्बों में भी तेजी से फैल रही है।
पुलिस को भी ऐसे शातिर अपराधियों की वारदात को खोलने में। खासी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। हाल ही में 14 मार्च के दिन जालौर जिले के साफाड़ा में सुमेरपुर के व्यापारी के साथ हुई ₹400000 की लूट के मामले में भी पुलिस को साइबर एक्सपर्ट की सहायता लेनी पड़ी और उसी मदद से पुलिस ने महज 4 दिन में ही लुटेरों को धर दबोचा।
व्हाट्सएप कॉलिंग और चैटिंग के जरिए लुटेरे आपस में कनेक्ट रहते थे और रेकी करने के बाद वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते थे। इसके बाद अपने अपने काम धंधे में व्यस्त हो जाते। लेकिन आलासन बालाजी मंदिर के सीसीटीवी में कैद हुई लुटेरों की फुटेज से अपराधी पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
लुटेरों ने पुलिस की नजर से बचने के लिए व्हाट्सएप कॉलिंग और चैटिंग का सहारा लिया। वहीं पुलिस के लिए सीसीटीवी फुटेज भी वारदात खोलने में मददगार बनी। यानी अपराध करने और वारदात खोलने में दोनों ही तरफ से टेक्नोलॉजी की अहम भूमिका सामने आई।
जालौर से सुरेश धवल की खबर।


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