जयपुर. तकनीक के मामले में भले ही इंसान मंगल ग्रह तक अपनी पहुंच दर्शा चुका है। लेकिन इस धरती पर ही कई बार ऐसे नजारे सामने आते हैं। जहां हमें यह सोचने को विवश होना पड़ता है कि क्या हम वाकई में एक इंसान होने का फर्ज अदा कर रहे हैं? इसे हम कुछ इस तरह भी समझ सकते हैं कि जैसे जैसे हमने तकनीकी उन्नति के नए आयाम तय किए हैं। विकास की नई परिभाषाएं घड़ी है। वैसे ही दूसरी और इंसानियत की भावनाएं भी हमसे कमोबेश दूर होती जा रही है।
अब यह दृश्य देखिए! हम नियम कायदों के चलते या फिर इंसानियत के चलते आपको यह स्पष्ट दिखा नहीं सकते। वैसे बता दें कि यह तस्वीर है राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह चिकित्सालय के सामने रोड पर घायल अवस्था में पड़े एक वृद्ध व्यक्ति की। इसके बदन पर नाम मात्र भी कपड़ा नहीं है और सिर से खून भी बह रहा है। सड़क पर बेहोश पड़े इस वृद्ध को देखने के लिए सैकड़ों लोग रुके इसे देखा और आगे चल दिए। किसी ने तो इसका वीडियो भी बना लिया।
लेकिन किसी भी राहगीर ने यह जहमत उठाने की कोशिश नहीं की। कि इसे सड़क से उठाकर चंद कदम की दूरी पर स्थित अस्पताल में पहुंचा दें? अस्पताल पहुंचाना तो दूर किसी ने उसके नग्न शरीर को एक अदद कपड़ा भी मुहैया नहीं करवाया। राज काज न्यूज़ के संवाददाता ने जब यह माजरा देखा तो समझ में आ गया कि वास्तव में लोगों की संवेदनाएं समाप्त सी होती जा रही है। यह देख कर तो ऐसा लगता है कि मानव से तो पशु ही भले जो एक दूसरे का दुख समझते हैं और इसे दूर करने की दिशा में एकजुट होते भी नजर आते हैं।
राजकाज न्यूज़ कि आप से अपील है कि यदि कभी भी आपके सामने ऐसा नजारा हो तो कंधे उचका कर आगे बढ़ने की बजाय उस व्यक्ति की हर संभव मदद का प्रयास करें जिससे कि इंसानियत की भावनाएं जिंदा रह सके।
जयपुर से मनीष दाधीच की खबर


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