अजमेर. आप सृष्टि की निर्माता हैं,अगर सच्चे मन से कुछ सोच लिया तो अवश्य ही इसे प्राप्त कर लेंगे..यह कहना है अजमेर की उत्तर वृताधिकारी डॉ प्रियंका रघुवंशी का...डॉ रघुवंशी ने अपने पिता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए खुद के लक्ष्य की परवाह तक नहीं की और इसे छोड़ तक दिया.. दरअसल प्रियंका रघुवंशी जयपुर में बतौर लेक्चरर कार्यरत थी.. लेकिन उनके जहन में यह था कि पिता का सपना अवश्य पूरा करना है.. पिता आईएएस से रिटायर्ड होने के कारण यही चाहते थे कि तीनों संतानों में से एक प्रशासनिक सेवा में जाएं..
यही कारण रहा कि स्टूडेंट्स की फेवरेट लेक्चरर प्रियंका अब अपराधियों के छक्के छुड़ा रही है....भाई इंजीनियर और बहन है डॉक्टर डॉ प्रियंका रघुवंशी ने बताया कि उनका जन्म आरएएस अधिकारी के घर में हुआ.. उनसे बड़ी एक बहन है जो एसएमएस अस्पताल में डॉक्टर है और छोटा भाई इंजीनियर है.. वह भी लेक्चरर बनकर अपना जीवनयापन कर रही थी.. लेकिन पिता के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने लेक्चरर होते हुए भी प्रशासनिक सेवा में जाने का मानस बनाया और आरएएस की प्रतियोगी परीक्षा दी.. जिसमें उन्हें प्रशासनिक तो नहीं लेकिन पुलिस अधिकारी का पद अवश्य मिला...
पुलिस से पूर्व में नहीं पड़ा पाला,
डॉ रघुवंशी ने कहा कि बतौर पुलिस अधिकारी आने से पहले कभी भी उनका पाला पुलिस से नहीं पड़ा.. उन्होंने यहां तक कहा कि पहली बार थाना भी जब ट्रेनिंग में बतौर थानाधिकारी संभाला तब ही देखा.. उन्होंने कहा कि पहले पुलिस के बारे में वही सब सुना था जो आमजन ने सुना लेकिन वह कभी भी सुनी सुनाई बातों पर विश्वास नहीं करती थी.. यही कारण रहा कि यहां आकर पुलिस का अनुभव लिया..
जांच करते हुई भावुक,
डॉ रघुवंशी ने कहा कि जब पहली बार उन्हें नाबालिग बच्ची की जांच दी गई और वह बच्ची के पास पहुंची तो उसका दर्द देखकर वह भावुक हो गई.. उस दौरान जैसे तैसे खुद पर काबू किया, लेकिन आज भी वह घटना ऐसी है जो वह कभी भी नहीं भूल सकती.. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि महिला अत्याचार ही नहीं बल्कि कई कानूनों का दुरूपयोग होता आया है... लेकिन पुलिस और न्यायपालिका का यह उद्देश्य होता है कि वह निर्दोष को किसी भी सूरत में नहीं फंसने दें.. यही कारण है कि डॉ रघुवंशी पोक्सो के मामले में हाईकोर्ट तक जाकर भी जवाब तलब करके आ चुकी हैं और अपनी जांच को सही साबित करवाया..


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