नमस्कार! कल रात को जब से पता चला कि अलवर जिले के अलवर के नरेली थाने थाने के थानेदार ने क्या जघन्य अपराध कर डाला है तब से बहुत विचलित था। सुबह जब प्रदेश के प्रमुख अखबारों में इसको देखा तो पता चला कि सिर्फ मैं ही नहीं बल्कि सभी विचलित है। इससे पहले कि कुछ और सोचता अजमेर में अहमदाबाद से आई एक युवती के साथ बलात्कार होने की घटना सामने आ गई। युवती गंभीर हालत में अजमेर के जेएलएन अस्पताल में अपना इलाज करवा रही है। महिला दिवस की पूर्व संध्या को ही गंगानगर जिले में एक गर्भवती महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। 

कुल मिलाकर यह देखा जाए तो मुख्यमंत्री नेता विधायक और आला अधिकारी महिला दिवस पर कई नारे लगाते तो दिखाई देते हैं, लेकिन धरातल पर इसकी सच्चाई साबित करते हुए महिला दिवस कहीं नजर नहीं आता। प्रदेश में महिलाओं के प्रति हो रहे अपराध में जिस कदर बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। एनसीआरबी की ओर से हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के मामले में शायद राजस्थान का नाम शीर्ष पर है और देखा जाए तो सिर्फ महिलाओं के प्रति ही अपराध नहीं बड़े बल्कि प्रदेश की ओवरऑल कानून व्यवस्था ही चरमराती हुई नजर आ रही है।

कोरोना के अभिशाप ने और कुछ अच्छा किया या ना किया लेकिन अपराधियों को अपने घरों और दड़बों में दुबका दिया था। और अपराध का ग्राफ अचानक सबसे निचले स्तर पर चला गया था लेकिन जैसे ही केंद्र और राज्य सरकार ने लॉकडाउन के नियमों में ढील देना शुरू किया। तो एक बार फिर अपराधियों ने अपने कारनामों को अंजाम देना शुरू कर दिया। हत्या लूटपाट, सेंधमारी, चोरी चकारी अवैध बजरी खनन, राहजनी, एटीएम उखाड़ना पुलिस पर हमले, अपहरण,  बलात्कार और सरेराह छीना झपटी जैसे अपराधों का ज्वार ही फूट पड़ा। अब यह तो कहना उचित नहीं कि लाक डाउन के नियमों में छूट देना गलत था क्योंकि कोरोना के कारण केंद्र और राज्य सरकार की आर्थिक हालत बिलकुल कंगाली के कगार पर पहुंच चुकी थी। 



ऐसे में उनका यह कदम उठाना जरूरी था। लेकिन जिस कदर अपराध बढ़े उसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कानून व्यवस्था के मामले में कुछ ना कुछ, कहीं ना कहीं तो गड़बड़ है। तत्कालीन डीजे भूपेंद्र सिंह खराब कानून-व्यवस्था का इनाम पाकर अब आरपीएससी के चेयरमैन बन गए। वर्तमान डीजीपी साहब ऐसे तो बहुत ही योग्य व्यक्ति है, लेकिन उसके बावजूद भी कानून व्यवस्था को तरीके से पालन ना करने की दिशा में कुछ भी होता दिखाई नहीं दे रहा।

कुछ जानकार लोगों का मानना है कि बेहतर यह होता कि प्रदेश में एक डेडीकेटेड होम मिनिस्टर होता क्योंकि वर्तमान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो कि खुद एक कुशल प्रशासक के रूप में जाने जाते हैं। उनके पास गृह विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी है। यानी कि वह प्रदेश के गृहमंत्री भी हैं। अब यह कल्पना कीजिए कि मुख्यमंत्री के पास खुद इतने काम होते हैं कि उनको एक एक तरह से कहा जाए तो सांस लेने की फुर्सत भी नहीं। उनके ऊपर पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी होती है और यह तो कोरोनावायरस चल रहा है जिसमें मानव इतिहास के अकल्पनीय हालात सामने आए हैं। 

ऐसे में मुख्यमंत्री ने इस महामारी से निजात पाने की दिशा में दिन रात एक कर दिया।  बीमारी को न केवल फैलने से रोका बल्कि इसकी चपेट में आए मरीजों के इलाज की  दिशा मे चिकित्सा व्यवस्था को भी एकदम चाक-चौबंद करके दिखाया। गहलोत के इस काम की ना केवल प्रदेश में बल्कि दुनिया भर में जमकर प्रशंसा भी हुई और ऐसे हालात के बावजूद प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर वापस लाने की दिशा में भी उन्होंने अभूतपूर्व काम किया और तो और केंद्र में भाजपा सरकार से राज्य के लिए जारी विभिन्न मदों की राशि को भी लाने के प्रयास निरंतर करते रहे।

और गहलोत प्रदेश के ही नहीं बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता है। ऐसे में पार्टी के भीतर क्या चल रहा है, इसकी हर गतिविधि पर भी उनकी नजर बनी रहती है। कांग्रेस आलाकमान के साथ सामंजस्य बिठाए रखना भी उनको व्यस्त रखता है। अब इतनी व्यस्तता ओं के बीच जब आला अधिकारी ही उनसे मुलाकात को तरस जाते हैं तो यह कयास कैसे लगाया जाए कि एक आम आदमी अपनी पीड़ा को लेकर कैसे उनके दर तक पहुंचेगा और उसकी फरियाद समय रहते सुनी जाएगी। 

क्या यह बेहतर नहीं होगा कि वह अपने पूर्व कार्यकाल की तरह जिसमें उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल को गृह विभाग की कमान सौंपी थी। ऐसे ही किसी योग्य नेता को गृह विभाग का प्रभार सौंपे और खुद इसकी बीच-बीच में मॉनिटरिंग करते रहें। यहां यह बात जरूर कहेंगे कि वर्तमान गहलोत सरकार में भी ऐसे योग्य नेताओं की कमी नहीं जो गृह विभाग को बखूबी संभाल सकते हैं। ऐसे में गृहमंत्री का यह दायित्व होगा कि वह डीजीपी सहित विभाग के आला अफसरों से सीधा तालमेल रखेगा और कोई भी बड़ी घटना होते ही तुरंत एक्शन लेने की कवायद भी शुरू होगी। 

इससे ना केवल महकमे को सरकार का सीधा संदेश जाएगा बल्कि तुरंत एक्शन होते ही अपराधियों के हौसले भी पस्त होते दिखाई देंगे। और जाहिर है इससे अपराधों का ग्राफ भी नीचे की ओर आएगा। एक उदाहरण के तौर पर समझे तो हाल ही में डेलीश डेलीकेशन जो कि प्रदेश में इन्वेस्टमेंट करने की दिशा में राजधानी आया था और उस डेलिगेशन के सदस्यों को जब प्रदेश में हो रहे अपराधों का स्तर दिखेगा तो जाहिर है उनके मानस में भी कहीं ना कहीं  नकारात्मकता पैदा होगी और उनका मानस भी बदल जाए इसमें कोई दो राय नहीं। 

इसलिए प्रदेश के प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री गहलोत जल्द ही यह फैसला करें और प्रदेश में एक डेडीकेटेड गृहमंत्री को काबिज करने की व्यवस्था करें जिससे कि अपराध और अपराधियों पर वक्त रहते लगाम कसी जा सके और राजस्थान में एक बार फिर वैसा ही शांति और कानून व्यवस्था का माहौल हो जिसके लिए राजस्थान प्रदेश जाना जाता है।