हनुमानगढ। जिले की सड़कों पर दोपहिया वाहन में फर्राटे मारते हुए नाबालिग हर समय हर तरफ देखने को मिल जाते है। बावजूद इसके पुलिस ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय मूकदर्शक बनी हुई है। कुछ स्कूलों को  "राजकाज न्यूज़" ने कवर किया है। सबसे पहले हम जिला मुख्यालय पहुंचे। जहां प्रशासन के अधीन आने वाले कॉन्वेंट स्कूल के सामने दर्जनों बच्चे बिना हेलमेट के ट्रिपलिंग करते व बुलट जैसे 150-200 CC जैसे भारी वाहन चलाते दिखे।

इनके पास लाइसेंस तक नही है। क्योकि नियमानुसार इनकी उम्र लाइसेंस आवेदन के लिए अधिकृत नही है। ऐसा ही नजारा अन्य स्कूलों के बाहर देखने को मिला।  एनपीएस स्कूल के प्रचार्य से इस बाबत बात की तो उनका कहना था, कि वे हमेशा बच्चों व उनके अभिभावकों से समझाइश करते है। इसके साथ-साथ पुलिस के सहयोग से यातायात नियमों की पालना हेतु जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। 


सड़क हादसों में कमी आये इसके लिये हाल ही में यातायात पुलिस व प्रशासन ने हजारो रुपये खर्च कर "सड़क सुरक्षा सप्ताह" की जगह "सड़क सुरक्षा माह" मनाया है। लेकिन नतीजा जीरो। जब हमने यातायत थानाप्रभारी अनिल चिन्दा से बात की तो वे रटे-रटाये कागजी आश्वासन देते दिखे। सड़क हादसों में महायुद्धों से अधिक मौतें होती है। सुप्रीम कोर्ट को यहां तक कहना पड़ा कि देश में इतने लोग सीमा पर या आतंकी हमले में नहीं मरते जितने सडकों हादसों की वजह से मर जाते हैं। पिछले एक दशक में ही भारत में लगभग 14 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए हैं।


विश्व सड़क सुरक्षा से संबंधित ब्रासिलिया घोषणा-पत्र में भारत ने सड़क दुर्घटनाओं में 2020 तक 50 प्रतिशत तक कमी लाने का संकल्प जताया था। जबकि सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मौतों में भी 2.37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हो गई। सेव लाइफ फाउंडेशन’ के आंकड़ों के अनुसार भारत में सड़क दुर्घटना में पिछले 10 सालों में 13,81,314 लोगों की मौत और 50,30,707 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। देश में हर 3.5 मिनट में एक व्यक्ति की मौत सड़क दुर्घटना में हो जाती है। 4 फीसदी दुर्घटनाओं के पीछे नाबालिग ड्राइवर होते हैं।


  पहली बार 2016 में नाबालिग ड्राइवरों के आंकड़े भी पेश किए गए हैं। सरकार द्वारा जारी नई अधिसूचना के तहत लाइसेंस के लिए आवेदन करने की उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष तक की कर दी गई है। लेकिन 16 वर्ष में बनने वाले ड्राइविंग लाइसेंस धारक केवल 50 सीसी वाली ई-बाइक्स या ई-स्कूटर चलाने के लिए ही मान्य है। और इन दोपहिया वाहनों की स्पीड 70 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक नहीं होनी चाहिए। वाहन की इंजन क्षमता 4.0 किलोवॉट तक सीमित होनी चाहिए। अगर नाबालिग वाहन चालक की वजह से हादसा होता है तो उसके नुकसान की भरपाई व दंड वाहन चालक व उसके माता-पिता को भुगतान पड़ता है। लेकिन इस ओर ना तो अभिभावक गंभीर है। ना ही पुलिस व प्रशासन।

हनुमानगढ से विश्वास कुमार की खबर,