हनुमानगढ़ से विश्वास कुमार।
हनुमानगढ़ महिला की हत्या के बाद शव के साथ दुष्कर्म करने के मामले में जिला एवं सेशन न्यायालय ने दोषी युवक सुरेन्द्र कुमार उर्फ मांडिया को फांसी की सजा सुनाई। संभवत: पिछले कुछ बरसों में फांसी की सजा सुनाए जाने का यह पहला मामला है। खास बात यह है कि पीलीबंगा थाना पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के सात दिन के भीतर ही चालान पेश कर दिया था। न्यायालय ने भी चालान पेश होने के 66 दिन के भीतर ही सुनवाई पूर्ण कर फैसला सुना दिया। राज्य की ओर से लोक अभियोजक उग्रसैन नैण ने पैरवी की। प्रकरण के अनुसार 16 सितम्बर 2021 को 60 वर्षीय विधवा के देवर ने पीलीबंगा थाने में हत्या व दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। उसने पुलिस को रिपोर्ट दी थी कि उसके भाई की तीन वर्ष पहले मौत हो चुकी है तथा भाभी घर में अकेली रहती थी। उसके कोई संतान नहीं थी। भाभी 15 सितम्बर की रात करीब साढ़े दस बजे उनके घर आई और कहा कि सुरेन्द्र कुमार उर्फ मांडिया (19) पुत्र बंशीलाल निवासी वार्ड दस दुलमाना थोड़ी देर पहले घर में घुस आया था। वह गलत नीयत से छेड़छाड़ करने लगा। उसे धमकाया तो वह उसका मोबाइल फोन उठाकर भाग गया। भाभी ने सुरेन्द्र से अपना मोबाइल फोन दिलवाने की बात कही। रात का समय होने के कारण अगली सुबह मोबाइल फोन दिलवाने का भरोसा दिलाते हुए भाभी को अपने घर पर ही सो जाने के लिए कहा। मगर घर में भैंस व अन्य मवेशी बंधे होने के कारण उनकी रखवाली के लिए भाभी को अपने घर जाना पड़ा। आरोप था कि रात को करीब एक बजे सुरेन्द्र उर्फ मांडिया ने शराब के नशे में किसी ग्रामीण से कहा कि उसने वृद्ध महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी है। परिवादी को यह सूचना मिली तो वह अन्य ग्रामीणों के साथ भाभी के घर गया। वहां वृद्धा का शव चारपाई पर पड़ा मिला। मृतका के देवर ने आरोप लगाया कि सुरेन्द्र उर्फ मांडिया ने दुष्कर्म की नीयत से भाभी के घर में प्रवेश किया। दुष्कर्म करने का प्रयास किया। विरोध करने पर वह कामयाब नहीं हुआ तो भाभी की गला घोंटकर हत्या कर दी। फिर हत्या करने के बाद लाश से दुष्कर्म किया। पुलिस ने धारा 450, 376 व 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसी दिन आरोपी युवक सुरेन्द्र उर्फ मांडिया को गिरफ्तार कर लिया। लोक अभियोजक उग्रसैन नैण ने बताया कि जिला एवं सेशन न्यायाधीश संजीव मागो ने आईपीसी की धारा 302 में दोषी युवक को फांसी तथा दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं आईपीसी की धारा 376 में आजीवन कारावास तथा दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा दी है। जबकि आईपीसी की धारा 450 में तीन साल कारावास व दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।